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काव्य कौमुदी चेतना हिंदी मंच द्वारा पितृदिवस के उपलक्ष्य में द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन सम्पन्न

उत्तर प्रदेश : काव्य कौमुदी चेतना हिंदी मंच के परिवार द्वारा पितृदिवस के उपलक्ष्य में द्विदिवसीय (12 एवं 13 जून , 2021) को भव्य अंतरराष्ट्रीय कविसम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें देश – विदेश के प्रसिद्ध कवियों एवं कवित्रियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई ।काव्य कौमुदी चेतना परिवार की अध्यक्ष डॉ कुमुद बाला ने बताया कि हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की मुहिम तेज हो गयी है और मशाल तबतक जलेगी जबतक हिंदी राष्ट्रभाषा घोषित नहीं हो जाती क्योंकि हमारा देश विशाल है , समृद्ध है , विकास की डगर पर चल रहा है किंतु भाषा नहीं है।हमें गूँगा राष्ट्र बर्दाश्त नहीं है।उत्तर भारत और दक्षिण भारत की परिस्थितियों में अंतर है ।दक्षिण भारत हिंदी के विरूद्ध नहीं है बल्कि यह राजनीति का हिस्सा है ।दक्षिण भारत के विभिन्न भाषाओं को बोलने वाले लोगों ने यह दिखा और दर्शा दिया है कि हिंदी भाषा से उन्हें बहुत प्रेम है और वे हिंदी सीखना चाहते हैं ।काव्य कौमुदी चेतना हिंदी मंच पर दक्षिण भारत के कवियों की उपस्थिति ने हिंदी के लिए समर्पित इस मंच को और मजबूती प्रदान की है।द्विदिवसीय इस कविसम्मेलन की शुरूआत सरस्वती वंदना से हुई जिसे कुमारी पूजा तोमर ने प्रस्तुत किया। प्रथम दिवस की अध्यक्ष थीं आगरा से हमारे साथ जुड़ीं रमा वर्मा ‘ श्याम ‘ जी । वे संस्थापक : साहित्य साधिका समिति,

सदस्य : संगीत संगम ,वनिता विकास, समान्तर संस्था , संस्थान संगम ,आथर्स गिल्ड आफ इण्डिया, युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच , शब्द निष्ठा आदि आदि

साहित्यिक अवदान : हथेलियों में कैक्टस , दर्पण में चेहरे , कुहरे के बाद , संवेदनाओं के पंछी ,उजालों के अंकुर , स्मृतियों के संदली वन , सलाखों बोलतीं हैं (कहानी संग्रह), आदमी का सच (उपन्यास) तुम्हारी देहरी का दीया। प्रकाशनाधीन :टूटते तटबंध (कहानी संग्रह ) कविता के रंग बच्चों के संग (बाल कविता )।।

मुख्य अतिथि श्री सुशील सरित जी ताज नगरी के बेताज बादशाह हैं।उनकी करीब 72 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं तथा गायकी में उनका कोई सानी नहीं है।3000 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं तथा जीवन चक्र नामक फीचर फिल्म में चार गीत शामिल हैं।यू के एवं जापान में रचनायें पाठ्यक्रम में शामिल हैं।

विशिष्ट अतिथियों में प्रथम डॉ शशिरेखा रेड्डी जी संस्कृत में एम ए एवं पी एच डी हैं तथा 70 सालों से योग सिखा रही हैं।उन्हें योगरत्न की उपाधि भी मिली है ओर योग पर ही तेलुगु में उनकी पुस्तक भी प्रकाशित हुई है ।वे सिकंदराबाद के कस्तूरबा गाँधी महिला कॉलेज के संस्कृत विभाग से रिटायर्ड हुई हैं।

दूसरे विशिष्ट अतिथि आगरा के विख्यात स्वतंत्रता सेनानी, वरिष्ठ पत्रकार, कवि व लेखक श्री रोशन लाल गुप्त ‘करुणेश’ के पुत्र संजय गुप्त थे जो लगभग 38 वर्ष तक भारतीय स्टेट बैंक में विभिन्न पदों पर सेवा करने के उपरांत 30 जून 2019 को सेवानिवृत्त हुए । पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण संजय गुप्त बचपन से ही साहित्यिक गतिविधियों में रुचि लेने लगे । पत्र पत्रिकाओं में कहानी कविता व लेख प्रकाशित हुए।

द्वितीय दिवस के कविसम्मेलन के अध्यक्ष थे श्री रामेश्वर शर्मा जी जिन्हें सभी प्यार से रामू भैया कहते हैं। उनकी बहुत सारी किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं तथा उन्होंने करीब 43 चालीसा की रचना की है ।हिंदी के अलावा हाड़ौती राजस्थानी में भी उनकी कई किताबें उपलब्ध हैं।मंचों के वे जानेमाने कवि हैं।बहुत सारे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें प्राप्त हैं।

कवि सम्मेलन के द्वितीय दिवस की मुख्य अतिथि हैं जलगाँव – महाराष्ट्र की विश्वविख्यात कवयित्री डॉ प्रियंका सोनी ‘ प्रीत ‘ ।वे समाजसेविका के साथ – साथ उपन्यास्कार , कहानीकार , कवयित्री , समीक्षिका व क्रिटिक भी हैं ।देश – विदेश की पत्र – पत्रिकाओं में इनकी रचनाये प्रकाशित होती रहती हैं।उनकी अमृतधारा ग्रुप की कई शाखाएँ कार्यरत हैं एवं व्हाट्सएप ग्रुप भी सक्रिय है ।

कविसम्मेलन के विशिष्ट अतिथि थे – ताजनगरी से पधारे डॉ अशोक अश्रु जी ।डॉ अशोक अश्रु जी अधिवक्ता हैं एवं बहुत सारी संस्थाओं से जुड़े हुए हैं।पत्र – पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं और बहुत सारी पत्रिकाओं का उन्होंने सम्पादन भी किया है ।कई काव्य संग्रह एवं कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं ।इन्होंने चाय, चिड़िया पर चालीसा का भी सृजन किया है ।वर्तमान में वे संस्थान संगम मासिक पत्रिका के संपादक है।

द्वितीय विशिष्ट अतिथि हैं ताज नगरी के बेताज बादशाह डॉ राजेन्द्र मिलन जी ।उनका लिखा हुआ वीरांगना भीमा बाई पर उपन्यास एवं नाटक साहित्य जगत में बहुत प्रसिद्ध हो चुका है और जल्द ही प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी द्वारा अभिनित की जाएगी।कई बार इसका नाटक के रूप में मंचन हो चुका है ।मिलन जी के कई काव्य संकलन प्रकाशित हो चुके हैं।अभी वे अज़ल के रूप को निखारने का प्रयास कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम के तीसरे विशिष्ट अतिथि हैं बेंगलुरु के राजीव मूथेदाथ जी ।मातृभाषा मलयालम हैं मगर कई भाषाओं की जानकारी रखते हैं।इंग्लिश , मलयालम और अब हिंदी में भी कविताएँ लिखते हैं ।इन्होंने रफी के भी कई गाने गाये हैं।वे हुंडई मोटर्स से AGM के पोस्ट पर से रिटायर्ड हुए हैं ।

कार्यक्रम का शानदार संचालन डॉ कुमुद बाला ने किया। इस कार्यक्रम में निम्नलिखित कवियों ने भाग लिया, उनमें से प्रमुख तथा मुख्य आकर्षण पाँच वर्षीय बनारस से जुड़ी देवेशी सिंह रहीं जिन्होंने अपने पिता पर बहुत सुंदर कविता सुनाई ।प्रमुख कवि थे –

डॉ कुमुद बाला , रमा वर्मा ‘ श्याम ‘ , सुशील सरित , डॉ शशिरेखा रेड्डी , संजय गुप्त , विनीता शर्मा ,डॉ.भँवर छाया मालविका , डॉ निर्मला देवी चिट्टिल्ला , डॉ असीम आनंद , शिल्पी सिगनोदिया , मंजुला अस्थाना महंती , पुट्टापर्थी नाग पद्मिनी , मणिबेन द्विवेदी , डॉ भारती शर्मा , उमेशचंद्र श्रीवास्तव , डॉ के. तेजस्विनि , यशोधरा यादव यशो , कुमारी पूजा तोमर , विजयेता तिरकी , सुरेश पैगवार , आयुषी अग्रवाल , डॉ रमेश आनंद , रामू भैया , डॉ प्रियंका सोनी ‘ प्रीत ‘, डॉ राजेंद्र मिलन , राजीव मूथेडथ , अशोक अश्रु , विष्णु शर्मा हरिहर , योगीराज योगी , भगवत सिंह मयंक , डॉ कोयल बिस्वास , सुधा कुंमारी जुही , समता मिश्रा ,डॉ रमा बहेड़ , बिभा कुमारी , सरिता त्रिपाठी , डॉ गरिमा रावत , डॉ गुँजन , डॉ अनिता सिंह , डॉ कृष्ण लाल बिश्नोई , डॉ अनुपम सक्सेना जी , के गीता , जोबा मुरमू , दीपा गुप्ता , डॉ भारती सिंह। पंखुड़ी सिन्हा। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम भव्यता के साथ संपन्न हुआ।

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