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Poem : “जाता हुआ दिसंबर”

✍️ आशी प्रतिभा दुबे, ग्वालियर, म.प्र.

जाता हुआ ये दिसंबर
देखो कुछ कह रहा है,
बीती साल की स्मृतियों को,
खुशियों संग विदा किया हैं।।

आने वाले समय के भव्य,
स्वागत के लिए तत्पर खड़ा है
मुख मंडल पर मुस्कान लिए,
जाता दिसंबर कुछ कह रहा है।।

आओ समेट लो खुशियां तुम
मना लो त्यौहार में जा रहा हूं!
आने वाले कल में, याद बनकर
मैं एक अच्छी रहना चाहता हूं।।

मैं सबकी दुआए चाहता हूं,
सबसे मैं मिलना चाहता हूं,
सबके लिए अच्छी खबर चाहता हूं
जाता हुआ में कुछ कहना चाहता हूं।।

गिले शिकवे भूलकर सब,
तुम सबको ही गले लगाना
कोई यदि ना याद करे तुमको तो,
नई साल में तुम ही कदम बढ़ाना।।

बांटकर प्रेम के फूल तुम सबको
मुझे हर्षित कर, विदा कर जाना
कि जाता हुआ दिसंबर तुमसे
कुछ ये कहना चाहता है।।
आत्मसम्मान को मत गवाना…

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