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Poem : शुभ छब्बीस जनवरी प्यारी

✍️ शुचि गुप्ता

शुभ छब्बीस जनवरी प्यारी, स्वर्णिम उत्सव है आया।
फहरायें हम गगन तिरंगा, जन गण का मन हरसाया।।

भवन राष्ट्र पति परिसर शोभित,
गर्व राय सीना हिल पर है।
देता शुभ संदेश सभी को,
शासन जनता दिल पर है।

विश्व विजेता कर भारत को, जग ललाट सिर मौर बनाया।
फहरायें हम गगन तिरंगा, जन गण का मन हरसाया।

गुम्फित होते एक हार में,
माणिक धर्म जाति अरु भाषा।
बढ़े प्रगति पथ पर हम मिलकर,
जन जाग्रति उमगित अभिलाषा।।

बिगुल शेर ए हिंद बजाता, नफरत को है दफनाया।
फहरायें हम गगन तिरंगा, जन गण का मन हरसाया।।

युवा वर्ग सक्षम हाथों से,
जब दायित्व वहन होगा।
अर्वाचीन प्रवर भारत का,
करना निर्माण नवल होगा।

हर भारतवासी को उसका, मौलिक हक़ है दिलवाया।
फहरायें हम गगन तिरंगा, जन गण का मन हरसाया।

भूख, गरीबी, लाचारी की,
विदा धरा से अब करना है।
अनुशासन के डंडे से ही,
संविधान रक्षित करना है।

व्यक्ति खड़ा जो अंतिम सीढ़ी, बनना उसका हमसाया।
फहरायें हम गगन तिरंगा, जन गण का मन हरसाया।

देश भक्ति का दीप जलाए,
भारतीय सच्चा वो होगा।
मानवता को ही अपनाए,
विजई तब लोक तंत्र होगा।

जन गण मन की धुन है बजती, मात्र भूमि पर शीश नवाया।
फहरायें हम गगन तिरंगा, जन गण का मन हरसाया।

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