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पत्नी ने चाय बनाने में की देरी, तो पति ने धड़ से अलग कर दिया सिर

52 साल के एक आदमी ने गुस्से में हद ही पार कर दी। जब पत्नी ने कहा कि चाय बनने में अभी थोड़ा और वक्त लगेगा तो आदमी ने आव देखा ना ताव और तलवार से अपनी पत्नी का सिर ही कलम कर दिया। दरअसल आदमी दो बार चाय के लिए पूछ बैठा था। ऐसे में सब्र का बांध टूटते ही उसने हत्या को अंजाम दे दिया। ये घटना गाजियाबाद के भोजपुर गांव की है।

पत्नी का काट दिया गया गला

TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक 52 साल के धर्मवीर दिहाड़ी मजदूर हैं और पत्नी सुंदरी के जवाब से काफी गुस्से में थे। झगड़ा बढ़ गया और तलवार निकाल ली। पहले पीछे से पत्नी को कसकर पकड़ा और बाद में उसका गला काट दिया। सुंदरी जमीन पर गिर कर तड़पती रही और वहीं मौके पर दम तोड़ दिया। DCP (ग्रामीण) विवेक यादव ने बताया कि सुंदरी सुबह छह बजे उठकर मंगलवार को चाय बना रही थी। थोड़ी देर बाद धर्मवीर उठा और चाय के लिए आवाज लगाने लगा। दोनों के तीन बच्चे बगल वाले रूम में ही सो रहे थे।

पिता ने किचन में किया खून

पांच मिनट के बाद धर्मवीर छत पर ही बने एक किचन में गया और चाय के लिए दोबारा पूछा। पत्नी ने कहा कि चाय बनने में दस और मिनट लगेंगे और पांव से बर्तनों को लात मार दी। इसके बाद धर्मवीर नीचे उतरा और वहां से तलवार लेकर आया। सुंदरी अभी भी स्टोव पर चाय बना ही रही थी। ऐसे में धर्मवीर ने उसे पीछे से पकड़ा और तलवार से वार कर दिए।

पिता के खिलाफ बेटे की शिकायत

चीखने चिल्लाने की आवाज से बच्चे भी छत पर पहुंचे। इससे पहले की वो अपनी मां को बचा पाते धर्मवीर ने उन्हें भी तलवार दिखाकर डराया। बच्चे डर के मारे जाकर अपने कमरे में छिप गए। कपल के बेटे ने तुरंत पुलिस को खबर दी। पुलिस को बेटे ने बताया कि उसके पिता को दिन में छह से सात बार चाय पीने की आदत थी। अगर मां चाय बनाने से इनकार कर दे तो खूब झगड़ा होता। साथ ही लड़के ने बताया कि उसने कभी भी अपने पिता को मां पर हाथ उठाते नहीं देखा था। वो भी काफी दंग रह गया जब उसने छत पर अपनी मां को लहुलूहान पड़े हुए देखा।

FIR की गई दर्ज

पुलिस ने बताया कि जब वो मौका ए वारदात पर पहुंचे तो धर्मवीर अपनी पत्नी के शव के पास बैठकर रो रहा था। धर्मवीर को गिरफ्तार कर पत्नी के शव को ऑटोप्सी के लिए भेज दिया गया। महिला के परिजनों की शिकायत के आधार पर धर्मवीर के खिलाफ धारा 302 के तहत FIR रजिस्टर की गई है। अदालत में पेशी के बाद धर्मवीर को न्यायिक हिरास्त में भेजा गया है।

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