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Poem : “दर्द क्या होता है…”

✍️  मनीषा झा, (एम.एस.सी., बी०एड०), विरार, महाराष्ट्र

उनसे पूछो जिन्होंने अपने जीते जी
अपने पुत्र को खोए हो,
जो बच्चे अभी तक अपने पिता का
चेहरा तक नही देखा हो।

उन महिलाओं से पूछो जो
नौ महीने तक अपने गर्भ में रखती है
उस औलाद को, जो बड़े होकर उन्हें
वृद्धा आश्रम में अकेले छोड़ जाते हैं…

दर्द क्या होता हैं उनसे पूछो जो शादी के
अगले दिन ही अपने सुहाग को खो देती हैं,
उनसे पूछो जिसने जिंदगी भर एक सपना पूरे करने में पूरा
जी जान लगा देते हैं, फिर वह एक पल में टूट जाती है।

प्यार मोहब्बत से बिछड़ना
ये दर्द नही है दर्द तो,
वो है जो अपने लक्ष्य से प्यार करते
फिर वह लक्ष्य छूट जाता है।

तुम क्या जानो दर्द क्या होता,
दर्द तो वो उन मां से पूछो
जो अजन्मे बच्चे से इतना प्यार करती है,
फिर कुदरत उसे छीन लेते हैं…

दर्द क्या होता है उनसे पूछो जो दिन रात मेहनत करने के
बावजूद भी भूखा सोते हैं, दर्द उस पिता से पूछो जिस बेटी की
लालन पालन के लिए दिन रात मेहनत करते हैं, फिर उसकी शादी में महज एक दहेज नामक दानव के लिए बारात लौट जाती हैं…

दर्द तो उस भाई से पुछों जो बहनों की
हिफाजत में दिन रात लगा रहता है,
फिर कोई हैवान बीच रास्ते ही उसकी
बलि दे देते है महज चंद पल के सुख के लिए…

तुम कहते हो मुझे मेरी दोस्त से रिश्ता टूट गया
बहुत दर्द में हूं, तुम नादानो अभी तक दर्द का
मतलब ही नहीं जानते हो, दर्द तो वो दर्द होता है
जिसकी कोई दवा नहीं होती संयम धैर्य के सिवा…

दर्द उस किसान से पूछो जो धूप हो बरसात अपनी फसल की ख्याल रखता है, फिर वो ऊपज लागत से भी कम होती हैं, दर्द क्या होता उन मजदूरों से पूछो जो दिन भर मजदूरी करते हैं अपने बच्चों के खातिर, फिर भी उनको उनका मेहनताना नही मिलता हैं ऊपर से मांगने पर उससे और काम करवाया जाता हैं।

दर्द तो उन सभी औरतों से पूछो जो
पीड़ा और दर्द से लड़कर अपने बच्चे को
दुनियां में लाती है, फिर वह बच्चा
बड़ा होकर उनसे ही उनको दूर कर देता हैं…

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