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समानता का अधिकार

✍️ सीमा त्रिपाठी, लालगंज, प्रतापगढ़

किसी भी समाज का विकास तभी संभव है जब उस समाज में महिलाओं को समान अधिकार मिले। जिस तरह महिलाएं परिवार की ठीक से देखभाल करती है, उसी तरह समाज और देश के विकास के लिए महिलाओं का बहुत महत्व है। हालांकि आज भी कुछ देश ऐसे हैं जहां महिलाओं को समान अधिकार प्राप्त नहीं है। महिला समानता दिवस हर साल 26 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं की स्थिति मजबूत करने तथा उन्हें पुरुषों के समान अधिकार और सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। भारत में महिलाओं की स्थिति सदैव एक समान नहीं रही इसमें युगानुरूप परिवर्तन होते रहे हैं। उनकी स्थिति वैदिक युग से लेकर आधुनिक काल तक अनेक उतार-चढ़ाव आते रहे हैं तथा उनके अधिकारों में तदनुरूप बदलाव भी होते रहे हैं। किसी भी देश की तरक्की तभी संभव है जब उस देश की महिलाएं पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चले।

महिलाओं को स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान किया गया है ताकि वह स्वतंत्र रूप से भारत के किसी भी क्षेत्र में आवागमन निवास तथा व्यवसाय कर सकती है। स्त्रीलिंग होने के कारण किसी भी कार्य से उनको वंचित करना मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना गया है। वर्षों से महिलाओं ने समाज के अन्याय और पूर्वाग्रह को झेला है। लेकिन आज बदलते परिवेश के साथ उन्होंने अपनी पहचान बना ली है। उन्होंने लैंगिक रूढ़ियों की बेड़ियां तोड़ दी है और अपने सपनों एवं लक्ष्य की प्राप्ति के लिए मजबूती से खड़ी हैं। भारतीय संविधान भारत की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय धरोहर है। भारतीय संविधान के अंतर्गत महिलाओं को कई अधिकार प्रदान किए गए हैं। समाज में पुरुष महिला का भेदभाव समाप्त कर एक स्वस्थ समाज की स्थापना की जानी चाहिए। महिलाओं को समानता का अधिकार मिलना तभी संभव है। जब उन्हें इसका भली-भांति ज्ञान हो और उनके अधिकारों का क्रियान्वयन जन जागरूकता अभियान चलाकर किया जाना चाहिए।

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