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अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से सोने की कीमतों पर पड़ा असर

मुंबई : बुधवार को स्पॉट गोल्ड 0.65 फीसदी की गिरावट के साथ 1792.6 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड के नॉन एग्री कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च एवीपी प्रथमेश माल्या ने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के बढ़ने से स्पॉट गोल्ड में गिरावट आई, जिससे सर्राफा धातु को होल्ड करने की अवसर लागत बढ़ गई।

इसके अलावा, वायरस से संक्रमित मामलों में वृद्धि और तूफान इडा के बाद बाधित आपूर्ति के बावजूद अमेरिकी विनिर्माण गतिविधियों में लगातार वृद्धि ने बाजार के सेंटीमेंट्स को कमजोर किया। हालांकि, चीन में महामारी के व्यापक प्रसार और मंदी के बाद देशों में नए प्रतिबंध लगे और इसने सेफ हैवन एसेट सोने में गिरावट को सीमित कर दिया।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व नीति बैठक से पहले बाजार के सतर्क रहने की उम्मीद है क्योंकि अमेरिकी उपभोक्ता कीमतों में उम्मीद से धीमी वृद्धि ने एसेट पर्चेज प्रोग्राम में कमी आने की संभावना को धूमिल कर दिया। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक 21 और 22 सितंबर 2021 को निर्धारित है। आने वाले महीनों में अमेरिकी केंद्रीय बैंकों के रुख पर अनिश्चितता से बाजार सतर्क रहने और सोने की कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है।

कच्चा तेल: बुधवार को, डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.01 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 70.5 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ क्योंकि यूएस क्रूड इन्वेंट्री में गिरावट ने कीमतों को और अधिक बढ़ा दिया। एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (ईआईए) की रिपोर्ट के अनुसार यूएस क्रूड इन्वेंट्री 6.4 मिलियन बैरल से अधिक फिसल गया, जो बाजार की 3.5 मिलियन बैरल की गिरावट की उम्मीद को पार कर गया। यूएस क्रूड स्टॉक की वापसी तूफान इडा के बाद यू.एस. खाड़ी क्षेत्र में रिफाइनरियों से सीमित आपूर्ति के अनुरूप है।

इडा तूफान के तुरंत बाद एक और तूफान (निकोलस) अमेरिका की मैक्सिको की खाड़ी की ओर बढ़ गया, जिससे अमेरिका से तेल की आपूर्ति को खतरा पैदा हो गया। तूफान इडा के यूएस गल्फ कोस्ट से टकराने से 2 सप्ताह बाद सोमवार को यूएस गल्फ के तेल और गैस उत्पादन का 40 प्रतिशत से अधिक ऑफ़लाइन रहा।

साथ ही, आईईए को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में ईंधन की मांग में सुधार होगा और इससे बाजार की धारणा को और समर्थन मिला। आने वाले महीनों में तेल की मांग में सुधार पर दांव लगाने और अमेरिकी कच्चे माल की घटती सूची से तेल की कीमतों को समर्थन मिलने की उम्मीद है। हालांकि, चीन की अर्थव्यवस्था में धीमी वृद्धि और महामारी के व्यापक प्रभाव ने कच्चे तेल की कीमतों पर प्रतिकूल असर डाला है।

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