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‘‘मैं हमेशा से बाबासाहेब का किरदार पर्दे पर निभाना चाहता था और मेरा यह सपना सच हो गया‘‘: अथर्व 

एण्डटीवी के ‘एक महानायक डॉ बी. आर. आम्बेडकर‘ में युवा भीमराव का किरदार निभा रहे अथर्व ने कही यह बात

मुंबई : एण्डटीवी का ‘डॉ बी. आर. आम्बेडकर‘ इस 20 जुलाई से एक नये चरण में प्रवेश करने जा रहा है और इसमें अब अथर्व युवा ‘भीमराव आम्बेडकर‘ का किरदार निभाते नजर आयेंगे। नई सदी, नया शहर, नया विचार, पर भेदभाव असमानता का नहीं छूटा है साथ। भीमराव करेंगे असमानता के खिलाफ संघर्ष की शुरूआत, क्या आप इस न्याय की लड़ाई में देंगे भीमराव का साथ? अथर्व से हुई बातचीत में, उन्होंने एक महान नेता और डॉ भीमराव आम्बेडकर जैसे एक प्रेरणादायक किरदार को पर्दे पर उतारने के अपने अनुभव, इस भूमिका की तैयारियों और कई अन्य पहलुओं पर बात कीं।

खुलासच : आप डॉ बी. आर. आम्बेडकर की भूमिका निभा रहे हैं। आपको यह रोल कैसे मिला? आपको कैसा लग रहा है?

अथर्व : डॉ बी. आर. आम्बेडकर जैसे एक प्रेरणादायक किरदार को निभाने के लिये चुना जाना सम्मान की बात है। मैं हमेशा से ही बाबासाहेब की भूमिका को पर्दे पर साकार करना चाहता था और यह मेरे लिये किसी सपने के सच होने जैसा है। उनकी जिंदगी और विरासत कई लोगों के लिये प्रेरणा का स्रोत रही है। वह एक महान नेता, विचारक, समाज उद्धारक और इन सबसे बढ़कर भारत के संविधान के संस्थापक हैं। डॉ बी. आर. आम्बेडकर सर्वोत्कृष्ट नेता थे, जिनकी विरासत बेमिसाल है। इस तरह के एक बड़े किरदार को पर्दे पर निभाना एक बहुत बड़ी जिम्म्ेदारी है और मेरे लिये यह बहुत बड़ा पल भी है। डॉ आम्बेडकर की किताबों एवं कामों ने मुझे बहुत प्रेरित किया है। मैंने बचपन से ही उनके बारे में काफी कुछ पढ़ा है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मुझे इस शो का हिस्सा बनने और डॉ आम्बेडकर की भूमिका को पर्दे पर उतारने का मौका मिलेगा। मैंने कई राउंड्स में ऑडिशन्स दिये और इस रोल के लिये फाइनल किये जाने से पहले मेरा लुक टेस्ट भी किया गया। यह बेशक मेरे लिये एक बहुत बड़ा और गौरवपूर्ण पल है।

खुलासच : ‘एक महानायक डॉ बी. आर. आम्बेडकर‘ शो के बारे में आप कितना जानते हैं?

अथर्व : एण्डटीवी के शो ‘एक महानायक डॉ बी. आर. आम्बेडकर‘ में बाबासाहेब की एक अनकही जीवनगाथा को दर्शाया गया है। ऐसा पहली बार है, जब हिन्दी के सामान्य मनोरंजन चैनल के क्षेत्र में इस महान शख्सियत और धर्मयोद्धा के जीवन को पर्दे पर उतारा गया है और उनके एकीकृत भारत के प्रणेता बनने के सफर को दिखाया गया है। स्मृति सुशीलकुमार शिंदे के सोबो फिल्म्स द्वारा निर्मित, इस शो में बाबासाहेब की एक प्रेरणादायक कहानी दिखाई गई है। इस शो में पांच साल की उम्र से लेकर भारतीय संविधान के रचयिता बनने तक के उनके सफर को शामिल किया गया है। बेमिसाल एवं आकर्षक कहानी और प्रतिभाशाली कलाकारों के साथ इस शो ने दर्शकों के दिलों को जीता है और बेहद कम समय में ही उनका पसंदीदा शो बन गया है। मेरे परिवार के लोग और मेरे दोस्त यह शो बहुत शौक से देखते हैं। और उन्हें जैसे ही पता चला कि मुझे इस शो में डॉ भीमराव आम्बेडकर की भूमिका निभाने के लिये चुना गया है, उनकी खुशी की ठिकाना नहीं था। मेरी तरह ही वे भी सातवें आसमान हैं और काफी गर्व का अनुभव हो रहा है। मैं यह शो हमेशा देखता हूं और मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं इस शो में एक दिन लीड भूमिका निभाउंगा।

खुलासच : किसी दिग्गज नेता अथवा नामचीन व्यक्ति के किरदार को निभाने के अपने फायदे और नुकसान होते हैं? इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

अथर्व : सबसे पहले तो, मेरे लिये यह बेहद गर्व और सम्मान की बात है कि मुझे युवा डॉ भीमराव आम्बेडकर का किरदार निभाने का मौका मिला है। एक ऐसे शख्स की भूमिका निभाना, जिसने कई लोगों जिंदगी को प्रेरणा दी हो और जिसका एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व हो, जिंदगी में बस एक बार मिलने वाला सुनहरा अवसर है। हालांकि, यह बात भी सच है कि जब आप इस तरह की किसी शख्सियत को पर्दे पर उतारते है, तो आपकी तुलना उस असली व्यक्ति से की जाने लगती है। फिर चाहे उनका लुक हो, हाव-भाव हों, व्यक्तित्व हो, बोलने का अंदाज हो या फिर सम्पूर्ण अभिव्यक्ति ही क्यों न हो। हर बारीक से बारीक चीज पर ध्यान दिया जाता है। इनके अलावा, ज्ञान एवं शोध भी सबसे अधिक मायने रखते हैं। यह जरूरी है कि आप उस व्यक्ति के बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़े और जानें, उनके बारे में समझें और हर छोटी से छोटी चीज को अपने अभिनय में शामिल करें। आपके हर कदम पर दर्शकों की नजरें टिकी होती हैं।

खुलासच : डॉ भीमराव की भूमिका निभाने के लिये आपने क्या तैयारियां कीं?

अथर्व : डॉ भीमराव आम्बेडकर की जिंदगी को समझने के लिये और इस किरदार के साथ न्याय करने के लिये, मैंने काफी रिसर्च किया। मैंने बाबासाहेब के कामों के बारे में छपे विभिन्न लेखों को पढ़ा। विभिन्न लेखकों द्वारा लिखी गई उनकी जीवनी का अध्ययन किया और उनके बारे में, खासतौर से उनकी सीखों के बारे में पूरी जानकारी जुटाने की कोशिश की। हमारी टीम में एक जाने-माने रिसर्चर भी हैं, जिन्होंने मुझे डॉ बी. आर. आम्बेडकर के बारे में काफी कुछ बताया और इस भूमिका की तैयारी करवाई। बाबासाहेब के बारे में पढ़ने के अलावा, मैं उन पर बनी विभिन्न डॉक्यूमेंट्रीज भी देख रहा हूं, ताकि उन भावनाओं को समझ सकूं, जिन्हें पर्दे पर उतारने की जरूरत है।

खुलासच : इस भूमिका की तैयारी के दौरान क्या आपको किन्हीं खास चुनौतियों से गुजरना पड़ा, जिनके बारे में आप बताना चाहेंगे? क्या कोई डर या पूर्वधारणा भी होती है, जिनका सामना इतने महान किरदार को निभाते समय करना पड़ता है?

अथर्व : हर किरदार की अपनी कुछ चुनौतियां होती हैं। और जब आप कोई मशहूर और नामचीन किरदार निभाते हैं, तो ये चुनौतियां और भी ज्यादा बढ़ जाती हैं। यह कलाकार पर निर्भर करता है कि वह इन चुनौतियों को अवसर में बदले। ऑडिशन के दौरान ही, मुझे महसूस हो गया था कि किरदार की बारीकियों को सही तरीके से पर्दे पर उतारने के लिये कितनी कड़ी मेहनत, कमिटमेंट और स्टडी करने की जरूरत है। मुझे समझ आ गया था कि इसके लिये कितनी ताकत और ध्यान की जरूरत होगी। इस किरदार को पर्दे पर निभाना और इसके साथ न्याय करना तथा उनके व्यक्तित्व को सटीक तरीके से साकार करना एवं दर्शकों के साथ जुड़ना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। हर कदम को बारीकी से देखा जायेगा। इसलिये, उनकी जिंदगी और इतिहास के बारे में पढ़ना, रिसर्च करना और उसे समझना बहुत जरूरी है। रिसर्चर के साथ-साथ प्रोडक्शन टीम भी, मुझे अच्छी तरह से गाइड कर रही है। इस किरदार की तैयारी करने के लिये हमने एक गहन वर्कशॉप की योजना भी बनाई है।

खुलासच : बाबासाहेब और राष्ट्र एवं समुदाय के प्रति उनके योगदान के बारे में आप कितना जानते हैं?

अथर्व : बाबासाहेब भारतीय इतिहास के एक प्रमुख लीडर रहे हैं। चाहे समानता, नारी सशक्तिकरण के लिये उनका संघर्ष हो, या शिक्षा के सुधार अथवा पिछड़ों के उत्थान में उनका योगदान। उन्हें सभी भारतीयों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, जो उन्हें एक महान लीडर बनाता है। चुनौती देने और वह क्रांति लेकर आने, जिसने भारत मां के लिये लोकतंत्र को पुनर्परिभाषित किया, की उनकी योग्यता ने उन्हें लाखों भारतीयों की प्रेरणा बना दिया। हालांकि, उनके योगदान एवं उपलब्धियों की हर कोई कद्र करता है, लेकिन बहुत कम लोगों को ही उनकी जिंदगी के बारे में पता है और शो में उनकी इसी कहानी को बयां किया गया है।

खुलासच : क्या आपको डॉ आम्बेडकर के जीवन और उन चुनौतियों के बारे में पता है, जिनसे उन्हें अपने बचपन से जवानी के दौरान गुजरना पड़ा?

अथर्व : डॉ आम्बेडकर के सफर को कई बेहतरीन भाषणों, वीडियोज और शोध पुस्तकों में बेहद सावधानीपूर्वक बयां किया गया है। वह एक ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने लाखों भारतीयों के दिलों में अपनी एक महत्वपूर्ण जगह बनाई है। वह उन चीजों के लिये हमेशा से ही खड़े रहे हैं, जिन पर उनका भरोसा था, फिर चाहे जात-पात के भेदभाव की बेड़ियों को तोड़ना हो या शिक्षा में समानता की चुनौतियों से संघर्ष करना। उन्होंने अपनी जिंदगी और अपने आस-पास एवं अपने समुदाय के लोगों का जीवन बदलने के लिये शिक्षा का इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में किया।

खुलासच : हम सभी ने डॉ आम्बेडकर के बारे में पढ़ा है। आम्बेडकर जी की कोई एक खास बात, जिसने आपको प्रेरित किया हो?

अथर्व : हमारे समाज में जात-पात की दीवार सालों से रही है, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि हमने तब से लेकर अब तक एक बहुत लंबा सफर तय किया है। डॉ बी. आर. आम्बेडर ने लाखों भारतीयों को एक राष्ट्र एवं एक संविधान के दायरे में लाकर एकीकृत भारत की नींव रखी थी। उनकी सीख और उनके सिद्धांत आज भी देश भर में भारतीयों के लिये प्रासंगिक हैं।

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