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Chhatarpur : बक्स्वाहा जंगल बचाव अभियान हेतु पांच दिवसीय अनशन की अनुमति  प्रशासन ने की निरस्त

देश के प्रबुद्ध समाजसेवी शाम 8 बजे गूगल मीट के माध्यम से तय करेंगे आगामी रणनीति

रिपोर्ट : निर्णय तिवारी

छतरपुर, (म.प.) : बक्स्वाहा के जंगल बचाने हेतु बक्स्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन द्वारा प्रशासन से नियमानुसार पांच दिवसीय अनशन की अनुमति मांगी गई थी। जिला प्रशाशन द्वारा अनशन की अनुमति निरस्त करने पर पूरा मामला गर्मा गया है। बक्स्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के राष्ट्रीय प्रवक्ता व समजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने जिला प्रशासन के इस कदम को तानाशाही व गैर संवैधानिक करार दिया। अमित ने चेतावनी दी कि आंदोलनकारी कोरोना संकट काल को देखते हुए सरकार से सार्थक संवाद द्वारा समस्या का समाधान चाहते है, अगर प्रशासन शांति पूर्ण तरीके से किये जा रहे हमारे अभियक्ति के अधिकार को दबाएगा, तो हम जन संघर्ष के लिए मजबूर होंगे, जिसका जिम्मेदार शासन प्रशासन होगा। साथ ही प्रशासन के इस गैर संवैधानिक कदम के बाद देश के प्रबुद्ध समाजसेवी शाम 8 बजे गूगल मीट के माध्यम से आगामी रणनीति तय करेंगे।

अमित भटनागर ने बताया कि बक्स्वाहा के जंगल को बचाने हेतु सरकार में संवेदना जागृत करने व सरकार से सार्थक संवाद हेतु, बक्सवाहा जंगल बचाओ आंदोलन द्वारा छतरपुर के छत्रसाल चौक पर 26 से 30 जून पांच दिवसीय अनशन की अनुमति जिला प्रशासन से मांगी थी। आवेदन में अनशन के दौरान पूर्णतः शांतिप्रिय व कोविड – 19 की गाइडलाईन के पालन करने का लिखित आश्वासन भी दिया गया था, पर प्रशासन ने अपना तानाशाही पूर्ण रवैया दिखाते हुए हमारे शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति के अधिकार को छीनते करते हुए हमारी अनुमति को निरस्त कर दिया है। अमित का कहना है कि प्रशासन एक तरफ बड़े-बड़े व भीड़-भाड़ वाले आयोजनों को अनुमति दे रहा है व उन्हें स्वयं आयोजित कर रहा है, दूसरी तरफ वृक्ष बचाने जैसे शांतिप्रिय सीमित संख्या के आयोजन को तानाशाहीपूर्ण रवैया से दबा रहा है, इस तरह के दोहरे मापदंड लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि अभी वैक्सीन के लिए हर ब्लॉक तहसील स्तर पर प्रशासन द्वारा रैली आयोजित की जा रही है, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया जा रहा। प्रशासन द्वारा मेले जैसे आयोजनों को अनुमति दी जा रही है।  उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि वैक्सीन के लिए जनजागृति जरूरी है पर उतनी ही जरूरी या उससे ज्यादा जरूरी है हमारे जीवन का आधार हमें अस्तित्व प्रदान करने वाले इन जंगल का बचाव।

बक्स्वाहा बचाओ आंदोलन के दिलीप शर्मा का कहना है कि टीकमगढ़ क्षेत्र के सांसद वीरेंद्र खटीक द्वारा कोरोना के पीक समय मे सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, सत्ता पक्ष के नेता कई सम्मान कार्यक्रम व बूथ लेवल की मीटिंग आदि गैर जरूरी राजनैतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं, तब प्रशासन की कोरोना गाइडलाईन कहाँ है।

राजेश यादव व दिलीप शर्मा ने बताया कि जल्द हमने सरकार की उक्त गैर संवैधानिक रुख की जानकारी बक्स्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन की राष्ट्रीय कोर कमेटी के शरद कुमरे, अमित भटनागर, कृषि वैज्ञानिक सदाचारी सिंह तोमर, किसान यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष ईस्वर चन्द त्रिपाठी, आफताब आलम हासमी, डॉ शुभम सैयाम, वरुण दुबे, आनन्द पटेल, राजेश राजेस्वर, परमजीत सिंह सहित सर्वसेवा संघ के पूर्व अश्याक्ष अमरनाथ भाई, गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर, फिरोज मिथिबोरवाला, सचिन श्रीवास्तव, गणेश शर्मा, भूपेश भूषण, आशीष सागर, देश के प्रबुद्ध सामाजिक चिंतको को दी है, संकल्प जैन व बृजेश शर्मा ने बताया कि प्रशासन के तानाशाही पूर्ण रवैये व बक्स्वाहा के जंगल बचाने हेतु आगामी रणनीति के लिए आज शाम 8 बजे गूगल मीट के मध्यम से बैठक आयोजित कर निर्णय लिए जाएंगे।

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