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“जागरूक महिलाएं लिख सकती है समाज के परिवर्तन का अध्याय…”

  • मनीषा कुमारी

वर्तमान समय में महिलाओं को आगे बढ़ाने और स्वावलंबी बनाने के लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं। जो कि कुछ हद तक यह सफलता भी प्राप्त कर रही हैं। आज समाज शिक्षित तो हो रहा हैं, लेकिन महिलाओं के अधिकारों के लिए सोच अभीतक पूरी तरह से नहीं बदली हैं। 21वीं सदी में अगर हमें आगे बढ़ना हैं, अपने जीवन में तरक्की करना है, तो देश के समाज के हर एक इंसान को जागरूक होना होगा औऱ अंधविश्वास को रोकना होगा।

अभी के समय में कई सारे जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, कितने सारे संस्था प्रचार प्रसार कर रही हैं महिलाओं के जागरूकता के लिये, फिर भी देश की महिलाएं हर क्षेत्र में जागरुक नहीं हो पा रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह शिक्षा का अभाव है। उन्हें सही तरीके से जानकारी भी नहीं दी जाती की सच क्या है या झूठ क्या है? इसीलिए महिलाएं हो या पुरूष कभी-कभी अंधविश्वास के पात्र बन जाते हैं। इसीलिए आज के वर्तमान समय में हर क्षेत्र में महिलाओं को जागरूक होना जरूरी ही नहीं अतिआवश्यक हैं। एक जागरूक महिला अपने घर के विकास के साथ-साथ अपने गांव, अपने समाज व अपने देश को परिवर्तित कर सकती हैं औऱ उनके सोच को बदल सकती हैं, महिलाओं में वो ताकत हैं जो कि समाज औऱ देश मे सब कुछ बदलाव कर सकती हैं, वो घर हो या समाज सभी के समस्यायों का निपटारा वो पुरुषों से बढ़कर कर सकती हैं।

अगर एक महिला जागरूक होती हैं तो एक परिवार को नही अपितु पूरे समाज के औरतों को जागरूक और हर कार्य मे सक्षम बना सकती है, और बनाती भी हैं, हर लोक लज्जा को त्याग कर रूढ़वादी परम्परा को पीछे छोड़कर हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं, पैरों में बँधी बेड़ियों को तोड़कर आगे बढ़ रही हैं। यूं तो आज के जमाने में नारी किसी से कम नहीं रही है। पुरुषों के कंधे से कंधा मिलकर चल रही हैं। आज की नारी अपने अधिकारों के लिए जागरूक हो चुकी है और दूसरो को भी जागरूक और अपने हक के लिए प्रेरित कर रही है। वैसे तो प्राचीन काल से ही महिलाओं को उनको हक के लिए मार दिया जाता हैं, वो अपना निजी निर्णय भी खुद नही ले सकती थी। लेकिन जैसे -जैसे समय बीतता गया महिलाओं की सोच और समझ भी बदल गई है और वो एक स्वतंत्र महिला अभी के दौर में है। दुनिया के हर विकसित देश में महिलाएं उस मुकाम को पा चुकी है जहाँ पहले केवल पुरुषों को स्थान दिया जाता था। ये सब तभी सम्भव हुआ है जब नारी खुद के अधिकार, खुद के हक के लिए लड़ना सीख गई हैं । और जागरूक हो रही हैं। एक जागरुक औऱ उच्च कोटि के सोच वाली महिला पूरे देश को विकसित करने की ताक़त रखती हैं। एक जागरूक महिला अपने पसंदीदा शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं, समाज से खुद के लिए लड़ सकती हैं, हर वो सम्भव काम कर सकती हैं जिसकी वो हकदार है। हर सपनें को वो पूरा करती हैं हकीकत में बदलती हैं। जो समाज एक बंजर भूमि के जैसा है उस पर हरियाली लाती हैं और पुष्प की बहार करती हैं, समाज के हर एक मर्द की सोच को परिवर्तित करती हैं और समाज देश गांव परिवार को आगे बढ़ाने के लिए उनके सोच में परिवर्तन लाती है । औरते अब तो नई-नई सफलता की मिशालें गढ़ रहीं हैं, साथ ही समाज के पढ़े लिखे लोग लड़कियों की शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं, और शिक्षित महिलायें देश के विकास में अपना अहम योगदान दे रही हैं। एक नया इतिहास रचती हैं। सुने बागों में खुशियों के फूल खिलाती हैं। हर एक इंसान को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं वो हैं एक महिला। एक जागरुक जनसंख्या को नियंत्रित करने मे अहम भूमिका निभाती हैं। हर क्षेत्र में वो काम करती हैं अपने समाज की सेवा निःस्वार्थ रूप से करती हैं। तब ही तो हम कहतें हैं कि जागरूक महिला जागरूक परिवार, जागरूक परिवार, जागरूक समाज और जागरूक समाज, जागरूक देश जागरुक देश विकसित देश जागरुक दुनिया। तो सारी दुनिया के विकास के लिए उसकी नीव एक जागरूक महिला होती है। पति के पुराने सोच को बदल जिंदगी में आगे बढ़ना सिखाती है। इसीलिए कहा जाता हैं कि एक जागरूक महिलाएं लिख सकती हैं समाज के परिवर्तन का अध्याय….

“हौसलों से अपनी तकदीर को बदल देती हैं।
हिम्मतों से अपने समाज को बदल देती हैं।।

सोच से हर मर्द के सोच को बदल देती हैं।
सहनशक्ति से औरों के गमों को दूर कर देती हैं।।

मौत से लड़कर वो हर एक नया जीवन दान देती हैं ।
अब महिलाएं हारती नही दुनिया को हरा देती हैं।।”

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