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क्या सच में होली का त्योहार आया हैं ?

– मनीषा कुमारी

सर्वप्रथम आप सभी को होली के शुभ पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं एवम बधाइयाँ। इस बार की होली कोरोना वाली होली है। होली या कहे तो रंगों का त्योहार। होली हर साल फाल्गुन के महीने में विभिन्न प्रकार के रगों के साथ मनाई जाती है। सभी घरों में तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं। होली हिंदुओं के एक प्रमुख त्योहार के रूप में जाना जाता है। यह एक ऐसा रंग-बिरंगा त्योहार हैं जिसे हिन्दू ही नहीं बल्कि सभी जाति समुदाय के लोग बहुत ही हर्षाेल्लास के साथ मनाते हैं। होली का त्योहार लोग आपस में मिलकर, गले लगकर और एक दूसरे को रंग लगाकर मनाते हैं।

होली के रंग हम सभी को आपस में जोड़ता है, और रिश्तों में प्रेम और अपनापन के रंग भरता है। हमारी भारतीय संस्कृति का सबसे खूबसूरत रंग होली के त्योहार को ही माना जाता है। सभी त्योहारों की तरह होली के त्योहार के पीछे भी कई मान्यताएं प्रचलित है। कहा जाता हैं कि होली का त्योहार खुशियों का त्योहार हैं। उसदिन सब अपने गीले-शिकवे दूर कर एक-दूसरे को प्यार से गले लगाकर, सभी नफरतों को मिटाकर एक-साथ मे मनाते है। भारत में होली का उत्सव अलग-अलग प्रदेशों में अलग अलग तरीके से मनाया जाता है। क्या यह वाकई में ऐसा है? नही है कहने को बहुत कुछ हमने कहा बहुत पढ़ा और सुना भी लेकिन यह कहा तक सत्य है। आइये जानते हैं होली पे बहुत सारी कहानियां, कविताएं, तरह-तरह के शायरी प्रचलित हैं, सभी मे यही जिक्र किया गया हैं कि होली प्यार का त्योहार है, होली अपनो का त्योहार हैं लेकिन आजकल की वर्तमान स्थिति में वास्तविकता कुछ और हैं।

एक तरफ हम कहते हैं इस बार होली में हम सबको अपना बनाएंगे, जो मेरे साथ बुरा किये उसे भुल जाऐंगे फिर से एक साथ प्यार में होली का त्योहार मनाएंगे। लेकिन सही मायने में ऐसा कुछ भी नही होता हैं। जब हम होली के दिन अपने मन के नफरतो को, मन की गुस्सा को ही नही मिटा पा रहे तो क्या हम दूसरे को कैसे माफ कर पाएंगे । बधाइयाँ देना या शुभकामनाएं देने से होली नहीं होती है। उसके लिए हमे खुद को बदलना होगा। खुद की अन्दर की नफरते को दफनाना होगा। तभी हम सभी इस त्योहार को सही मायने में मना पाएंगे। जब हम एक-दूसरे को माफ ही नही कर पाते, उसे दिल से रंग या गुलाल नही लगा पाते तो फिर कैसा होली, बस एक ही सवाल मन मे आती है क्या सच मे होली का त्योहार आया है अगर नही आया तो कब सही मायनों में होली का त्योहार आएगा।

होली तो खुशियों की त्योहार है लेकिन क्या सभी आज के दिन खुशी है, कोई इस बार की होली में अस्पताल में हैं तो कोई देश के रक्षा में दिन रात जगे हैं। जिनके वजह से हम ये होली मना पा रहे हैं। कोई अपने भाई के इंतजार में है, तो कोई माँ अपने बेटे के इंतजार में, तो कोई अपने सुहाग के इंतजार में पलकों बिछाये राह देऽ रही हैं। सभी के लिए होली का त्योहार एक ही दिन आता है। लेकिन वो होली उनकी होली नहीं होती। मन मे वही कड़वाहट, वही बैर, वही गुस्सा तो फिर कैसे मनाये होली। और तो सबसे बड़ी बात यह है कि होली के दिन लोग नशा में इतने धुर्त हो जाते हैं कि उन्हें अपने परिवार की फिक्र भी नहीं रहती है। कोई अपने पति के लिए आँशु बहा रहे होते, तो कोई किसी के तालाश। ये सब तभी दुर होगी जब हम खुद को बदलने के लिये तैयार होंगे तभी सही रूप में होली का त्योहार आएगा। जिस दिन हम सभी सच्चे दिल से एक-दूसरे को हमेशा के लिए माफ कर देंगे। मन स्व अपना बना लेंगे सभी गिले-शिकवों को मिटा देंगे तब एक साथ ये होली का त्योहार मनाएँगे।

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