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Chattarpur : खजुराहो नृत्य महोसव में कला, योग, अध्यात्म का दिखा अनूठा संगम

कथक भरतनाट्यम के साथ मार्ग नाटय ने मोहा दर्शकों का मन

निर्णय तिवारी

छतरपुर : विश्व प्रशिद्ध धार्मिक और पर्यटन नगरी खजुराहो में मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग के उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत एवं कला अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा आयोजित 47वेंं भारतीय शास्त्रीय नृत्य विधाओं पर आधारित खजुराहो नृत्य समारोह के तीसरे दिन तीन प्रस्तुतियां हुई। जिन्हें देखकर दर्शक भावविभोर हो गए। भारतीय सांस्कृतिक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों से कलाकारों ने दर्शक से खूब तालियों बटोरी।जानकारी के अनुसार बीते २० फरवरी से खजुराहो के पश्चिम मंदिर समूह के अंदर चंदेल कालीन कंदारिया महादेव और जगदंबे मंदिर की अनुभूति के बीच मंच पर 26 फरवरी तक चलने वाले इस समारोह का 22 फरवरी नृत्य महोत्सव के तीसरे दिवस पियाल भट्टाचार्य व साथी, मार्ग नाट्य व सौरव-गौरव मिश्रा, कथक युगल के द्वारा नृत्य की प्रस्तुति व साथ ही सुलग्ना बैनर्जी और राजदीप बैनर्जी के कत्थक-भरतनाट्यम युगल को, उपस्थित जनसमूह ने काफी सराहा और तालियों के साथ कलाकारों का स्वागत किया। नृत्यों के भारतीय संदर्भ में लोक से लेकर शास्त्रीय नृत्य के विविध रूप आश्चर्य चकित करने वाले हैं। खजुराहो नृत्य समारोह शास्त्रीय नृत्य शैलियों को प्रदर्शन के लिए एक ऐसा प्रदर्शन स्थल है, जहां-जहां देश की ख्याति प्राप्त कलाकार अपने नृत्य की प्रस्तुति देने के बाद अपने आप को सौभाग्यशाली मानते हैं व अपनी प्रस्तुति के लिए सदैव उत्सुख नजर आते हैं। इन शास्त्रीय नृत्यों को परखने और समझने वाले अपना सब कुछ भूलकर नृत्य में इस तरह खो जाते हैं कि वह कलाकारों के ताल और चाप पर खुद भी थिरकते नजर आते हैं। शास्त्रीय नृत्यों में सौंदर्य कलात्मकता और अध्यात्म का संगम दिखाई देता है, मृदंग की तान में घुंघरू की खनक से खजुराहो नृत्य महोत्सव का यह मंच सात दिनों के लिए जागृत हो जाता है। कला, योग, अध्यात्म एवं संस्कृति नगरी खजुराहो, शिल्प कला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। तो वहीं वर्ष में 7 दिवस चलने वाला खजुराहो नृत्य समारोह भी काफी लोकप्रिय व प्रसिद्धि पा चुका है। कई देसी और विदेशी पर्यटक खजुराहो नृत्य समारोह का पूरे साल भर इंतजार करते हैं और इस आयोजन को लेकर उनकी उत्सुकता रहती है।

खजुराहो महोत्सव में प्रथम प्रस्तुति देने वाले गौरव सौरभ मिश्रा कत्थक युगल ने लोगों को भाव विभोर कर कर दिया और लोग 1 तक लगा, नृत्य में हुए नजर आए आपको बता दें सौरव सौरव मिश्रा विद्या सितार विशेषज्ञ पंडित अमरनाथ मिश्रा के पुत्र और भवानी प्रसाद मिश्रा के पोते हैं जो बनारस घराने के सुप्रसिद्ध सारंगी वादक थे मिश्रा बंधुओं द्वारा रविशंकर मिश्रा से कत्थक नृत्य कि प्रारंभ की गई। जिसके उपरांत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बिरजू महाराज के सानिध्य में दिल्ली में उनके निवास पर उनकी कार्य शालाओं के माध्यम से लगातार जारी हैं वे पदमश्री मालिनी अवस्थी, पदमश्री शोभा घोष और पंडित अमरनाथ मिश्रा के साथ प्रस्तुतियां भी दे चुके हैं। इनके द्वारा कई रंग मंच पर अपनी प्रस्तुतियां दी गई है जिनमें उत्तराखंड संगीत समारोह देहरादून देव दीपावली व वरुण महोत्सव वाराणसी दिल्ली कला केंद्र साधना समारोह कल आश्रम दिल्ली वसंतोत्सव संगीत नाटक अकैडमी नेहरू सेंटर मुंबई गोवा फिल्म समारोह संकट मोचन संगीत समारोह वाराणसी आदि प्रस्तुत किया।

वहीं कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति पियाल भट्टाचार्य एवं साथी मार्ग नाट्य द्वारा दी गई। जिसमें सभी दर्शकों को आश्चर्य में देखने के लिए मजबूर कर दिया लगभग दो दशकों से प्याल भट्टाचार्य अनवरत रूप से कार्य कर रहे हैं और भरत मुनि की विचार प्रेरणा से नाटक संबंधित तत्व सार के पुनरुत्थान पर काफी सक्रियता से कार्य कर रहे हैं। आपके अग्रणी कार्य की दूरी नाट्य प्रशिक्षण की ऐसी प्रणाली का विकास किया जो भरतमुनि के नाट्यकला संबंधी एवं कार्यों को नूतन अर्थ प्रदान करती है भरतमुनि भारतीय नाट्य संबंधी कला रूपों के पितामह माने जाते हैं और कई अर्थों में भट्टाचार्य जी का कार्य भरतमुनि के नाट्य संबंधी कार्य को सार्थक थी आज के संदर्भ में पुनर्वास पुनर व्याख्या करता है।

कार्यक्रम की तीसरी और अंतिम प्रस्तुति सुलग्ना बैनर्जी व राजदीप बैनर्जी कत्थक और भरतनाट्यम युगल द्वारा दी गई। सुलग्ना बैनर्जी ने विख्यात कत्थक विशेषज्ञ पंडित विजय शंकर से व कालांतर में कोलकाता के कत्थक शोध केंद्र से कब तक का विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। साथ ही उन्होंने विख्यात कब तक ग्रुप बिरजू पंडित महाराज की कथा कार्यशाला में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है, आप लगातार 25 वर्षों से नृत्य की प्रस्तुतियां अलग-अलग मंचों पर दे चुकी हैं। लखनऊ घराने से ताल्लुक रखने वाले भारतखंडे संस्थान से नृत्य में एमए किया। आपने अब तक की परंपरा में नवाचार के साथ-साथ गहन अभ्यास की साधना की है, वर्तमान में भी विख्यात तबला वादक पंडित दीनदयाल दिना नाथ मिश्रा के सानिध्य में विभिन्न मंचीय प्रस्तुतियां दे चुके हैं। जिनमें प्रमुख रूप से स्वामी हरिदास संगीत कला रत्न सम्मान, मैहर सेनिया घराना सम्मान, कोणार्क नृत्य चूड़ामणि सम्मान, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति सहित अनेक पुरस्कार आपने के नाम दर्ज हुए हैं। आप निरंतर कार्य शालाओं का आयोजन कर रहे हैं और भारत और विदेश में प्रदर्शनकारी कला रूपों के विस्तार की दिशा में भी आप पिछले 15 वर्षों से सक्रिय हैं।

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