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Mirzapur : तीसरी आँख – 7 मार्च का मतदान

👉 सुहावने मौसम में मतदान भी रहा सुहावना

👉 मतदान प्रतिशत कम रहा : तकनीकी कारण इसके लिए जिम्मेदार

👉 कलेजे के टुकड़े जैसे उपकरण पर आफ़त

👉 सुरक्षाकर्मी कहीं टँच तो कहीं दिखे रंज

✍️ सलिल पांडेय

मिर्जापुर, (उ.प्र.) : सुहावने फागुनी मौसम में सुहावने माहौल में ही विधानसभा के लिए चुनाव मतदान सम्पन्न हुआ। इक्के-दुक्के मामलों को छोड़ दिया जाए तो मतदान की पूरी प्रक्रिया को सौ में सौ नम्बर दिया जा सकता है।

सद्भाव : अन्य जनपदों से पूर्व के चरणों में चिक-चिक और खिच-खिच की बह कर आई हवाओं से अंदाजा यह लग रहा था कि मतदान के दिन सद्भाव के माथे पर बट्टा लग जाएगा लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। जातीय और साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को लेकर अंतिम दिनों तक लगाए जा रहे अनुमानों और आकलनों को औंधे मुंह धराशाई होते देखा गया। हर वर्ग के लोग सुकून पसंद देखे गए। वोट डाले और घर की ओर डगर नापे।

शहरी इलाकों में लंबी लाइनें नहीं लगीं : समय से मतदान प्रक्रिया शुरू हो जाने से प्रातः 7 बजे से लोग मतदान केंद्रों पर पहुंचने लगे। उम्मीद थी कि नगरीय इलाकों में ज्यादा मतदान होगा तो लंबी लाइनें लगेंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पूर्वाह्न 9 से 11 बजे तक भले लाइन लगी हो लेकिन किसी को अधिकतम 20 से 30 मिनट से ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा। यही स्थिति कमोवेश ग्रामीण इलाकों में भी रही।

मतदान केंद्र जो नए बन गए : इस बार अनेक नए मतदान केंद्र बन गए थे जिससे भीड़ और अव्यवस्था नहीं हो पाई।

नए जमाने के सबसे खास उपकरण पर आफ़त : सबसे ज्यादा आफ़त मोबाइल फोन को लेकर था। मोबाइल तो नए जमाने के लिए कलेजे के टुकड़े जैसा हो गया है। हर कोई मोबाइल लिए पहुंच रहा था लेकिन सुरक्षाकर्मी ‘मोबाइल लेकर न जाएं’ का जाप सुबह से शाम तक करते रहे। इससे जो अकेले गए थे, उन्हें दिक्कत हो रही थी और कुछ लौट भी गए।

मतदान कम होने के कारण :  2017 के मतदान से कम प्रतिशत का कारण मोबाइल के अलावा वोटर-स्लिप का भी कारण था क्योंकि BLO द्वारा घर-घर वोटर स्लिप नहीं पहुंच पाया था लिहाजा जब प्रत्याशियों की चौकी का स्लिप लेकर प्रत्याशी अंदर जा रहे थे तो मतदानकर्मी उसे नहीं मान रहे थे। झांव-झांव से बचने के लिए कुछ लौट जा रहे थे।

ह्वील चेयर की दिक़्क़त थी : अशक्त और वृद्ध वोटर फोर ह्वीलर से मतदान केंद्रों तक तो गए लेकिन अंदर जाने के लिए जब ह्वीलचेयर की मांग हुई तो वह नहीं मिल सका। नगर के ASJ इंटर कालेज में CRPF के जवान सहारा देकर अंदर ले गए जबकि राजस्थान इंटर कालेज में निजी ट्राई-साइकिल से पहुंचे वोटर को स्कूल के प्रवेश द्वार पर ढाल को पार कराते सुरक्षाकर्मी लगे रहे।

सुरक्षाकर्मियों का दर्द : नगर के सिटी कोतवाली क्षेत्र में पड़ने वाले मतदान केंद्रों के पुलिसकर्मी और CRPF के जवान तो खाने-पीने की व्यवस्था से तो टँच थे। खाने के पैकेट में पनीर की जब्जी से लेकर तरह-तरह के व्यंजनों का गुणगान कर रहे थे जबकि कटरा कोतवाली के अनेक केंद्रों पर ‘भूखे भजन न होई गोपाला’ मुहावरे का जप कर रहे थे। राजस्थान इंटर कालेज, यूसुफ इमाम स्कूल में एक दिन पहले यानी 6 मार्च को जब ड्यूटी करने आए तभी से उन्हें उपवास और व्रत का संकल्प करना पड़ गया। सोने की व्यवस्था रात में नहीं थी तो 50/- किराए पर गद्दा-बिछौना ले आए। इस इस क्षेत्र के सुरक्षाकर्मी से लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तक निजी भरोसे राशन-पानी में लगे थे।

ऐसी दिक्कत पहली बार : उड़ीसा, असम और जबलपुर से आए CRPF तथा मेरठ, सीतापुर, कौशाम्बी, गोरखपुर, तथा उन्नाव आदि जिलों से आए पुलिसकर्मी और होमगार्ड के जवानों का कहना था कि प्रत्याशी और निजी किसी व्यक्ति का आतिथ्य ले नहीं सकते और उनकी व्यवस्था समुचित पहली बार इसी जिले में नहीं हो पाई।

कटरा बाजीराव में झांव-झांव हो ही गया : प्रशासनिक अमला दौड़ पड़ा – जैन बाल मंदिर पर झगड़ा भी हुआ तो एक अशक्त सी आंगनवाड़ी 50 साल की महिलाकर्मी सावित्री देवी के साथ। दमदार लोगों ने बेदमदार-सी इस महिला को इतना होफ दिया कि वह बेहोश-सी होने लगी। कह तो रही थी कि हाथ भी चलाया गया। घनघनाने लगी फोन की घण्टी और पल भर में नगर मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह और सीओ सिटी प्रभात कुमार राय पहुंच गए। तब तक मजमा लग चुका था। नगर विधायक और भाजपा प्रत्याशी रत्नाकर मिश्र भी आ धमके । महिला सपा के लोगों को नामजद कर तहरीर दी। नगर मजिस्ट्रेट ने स्थिति की नाजुकता भांप कर मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए अस्पताल भेजने का आदेश सेक्टर मजिस्ट्रेट को दिया।

आस्तीन के सांपों की कहानी : आपस में सीधी तो कहीं त्रिकोणीय टक्कर दे रहे हर दलों में आस्तीन के सांपों पर नजर रखी जा रही थी। जो पैसा जिससे लिए उसके साथ वफादारी निभा रहे हैं या नहीं, इस पर भी मन्थन हो रहा था। कुछ आदतन ऐसा करते ही हैं।

बहरहाल दास्तान लंबी है। इस बीच मतदान का प्रतिशत जिले में 58% का रिकार्ड जारी किया गया। जिसमें छानबे 56, सदर 55, मझवां और चुनार 60 तथा मड़िहान 62% मतदान हुआ।

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